वाल्मीकि रामायण 5.56.3
काममस्य त्वमेवैकः कार्यस्य परिसाधने ।पर्याप्तः परवीरघ्न यशस्यस्ते बलोदयः॥
kāmamasya tvamevaikaḥ kāryasya parisādhane |paryāptaḥ paravīraghna yaśasyaste balodayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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