वाल्मीकि रामायण 5.58.139
तेन वालिनमुत्पाट्य शरेणैकेन संयुगे ।वानराणां महाराजः कृतः स प्लवता प्रभुः॥
tena vālinamutpāṭya śareṇaikena saṃyuge |vānarāṇāṃ mahārājaḥ kṛtaḥ sa plavatā prabhuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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