वाल्मीकि रामायण 5.58.22
मम भक्षः प्रदिष्टस्त्वममरैर्हरिसत्तम ।अतस्त्वां भक्षयिष्यामि विहितस्त्वं चिरस्य मे॥
mama bhakṣaḥ pradiṣṭastvamamarairharisattama |atastvāṃ bhakṣayiṣyāmi vihitastvaṃ cirasya me ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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