वाल्मीकि रामायण 5.58.61
तां दृष्ट्वा तादृशीं नारीं रामपत्नीं यशस्विनीम् ।तत्रैव शिंशुपावृक्षे पश्यन्नहमवस्थितः॥
tāṃ dṛṣṭvā tādṛśīṃ nārīṃ rāmapatnīṃ yaśasvinīm |tatraiva śiṃśupāvṛkṣe paśyannahamavasthitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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