वाल्मीकि रामायण 5.58.63
ततो ऽहं परमोद्विग्नः स्वं रूपं प्रतिसंहरन् ।अहं तु शिंशुपावृक्षे पक्षीव गहने स्थितः॥
tato 'haṃ paramodvignaḥ svaṃ rūpaṃ pratisaṃharan |ahaṃ tu śiṃśupāvṛkṣe pakṣīva gahane sthitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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