वाल्मीकि रामायण 5.58.64
ततो रावणदाराश्च रावणश्च महाबलः ।तं देशं समनुप्राप्त यत्र सीता ऽभवत् स्थिता॥
tato rāvaṇadārāśca rāvaṇaśca mahābalaḥ |taṃ deśaṃ samanuprāpta yatra sītā 'bhavat sthitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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