वाल्मीकि रामायण 5.60.2
अयुक्तं तु विना देवीं दृष्टवद्भिश्च वानराः ।समीपं गन्तुमस्माभी राघवस्य महात्मनः॥
ayuktaṃ tu vinā devīṃ dṛṣṭavadbhiśca vānarāḥ |samīpaṃ gantumasmābhī rāghavasya mahātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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