वाल्मीकि रामायण 5.62.28
स भग्नबाहूरुभुजो विह्वलः शोणितोक्षितः ।मुमोह सहसा वीरो मुहूर्तं कपिकुञ्जरः॥
sa bhagnabāhūrubhujo vihvalaḥ śoṇitokṣitaḥ |mumoha sahasā vīro muhūrtaṃ kapikuñjaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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