वाल्मीकि रामायण 5.68.3
यदि वा मन्यसे वीर वसैकाहमरिन्दम ।कस्मिंश्चित्संवृते देशे विश्रान्तः श्वो गमिष्यसि॥
yadi vā manyase vīra vasaikāhamarindama |kasmiṃścitsaṃvṛte deśe viśrāntaḥ śvo gamiṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें