वाल्मीकि रामायण 5.68.4
मम चाप्यल्पभाग्यायाः सान्निध्यात्तव वीर्यवन् ।अस्य शोकविपाकस्य मुहूर्तं स्याद्विमोक्षणम्॥
mama cāpyalpabhāgyāyāḥ sānnidhyāttava vīryavan |asya śokavipākasya muhūrtaṃ syādvimokṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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