वाल्मीकि रामायण 6.106.26
रथं शीघ्रमिमं सूत राघवाभिमुखं कुरु ।नाहत्वा समरे शत्रून् निवर्तिष्यति रावणः॥
rathaṃ śīghramimaṃ sūta rāghavābhimukhaṃ kuru |nāhatvā samare śatrūn nivartiṣyati rāvaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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