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वाल्मीकि रामायण 6.120.7
कथं देवगणश्रेष्ठमात्मानं नावबुध्यसे॥
kathaṃ devagaṇaśreṣṭhamātmānaṃ nāvabudhyase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंकथं देवगणश्रेष्ठमात्मानं नावबुध्यसे॥
kathaṃ devagaṇaśreṣṭhamātmānaṃ nāvabudhyase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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