वाल्मीकि रामायण 6.122.11
हर्षेण महता ऽ ऽविष्टो विमानस्थो महीपतिः ।प्राणैः प्रियतरं दृष्ट्वा पुत्रं दशरथस्तदा॥
harṣeṇa mahatā ' 'viṣṭo vimānastho mahīpatiḥ |prāṇaiḥ priyataraṃ dṛṣṭvā putraṃ daśarathastadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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