वाल्मीकि रामायण 6.122.14
अद्य त्वां निहतामित्रं दृष्ट्वा सम्पूर्णमानसम् ।निस्तीर्णवनवासं च प्रीतिरासीत् परा मम॥
adya tvāṃ nihatāmitraṃ dṛṣṭvā sampūrṇamānasam |nistīrṇavanavāsaṃ ca prītirāsīt parā mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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