वाल्मीकि रामायण 6.123.15
सव्रणैः प्रथमं गात्रैः संवृत्तैर्निर्व्रणैः पुनः ॥ ६.१२३.१५ ॥्च सलिलायुताः॥
savraṇaiḥ prathamaṃ gātraiḥ saṃvṛttairnirvraṇaiḥ punaḥ || 6.123.15 ||ca salilāyutāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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