Loading
वाल्मीकि रामायण 6.124.7
एवमुक्तस्तु काकुत्स्थं प्रत्युवाच विभीषणः॥
evamuktastu kākutsthaṃ pratyuvāca vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंएवमुक्तस्तु काकुत्स्थं प्रत्युवाच विभीषणः॥
evamuktastu kākutsthaṃ pratyuvāca vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें