वाल्मीकि रामायण 6.126.29
प्रवेशं चापि रामस्य पौरजानपदैः सह ।विभूतिं चैव सर्वासां स्त्रीणां दशरथस्य च॥
praveśaṃ cāpi rāmasya paurajānapadaiḥ saha |vibhūtiṃ caiva sarvāsāṃ strīṇāṃ daśarathasya ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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