वाल्मीकि रामायण 6.17.33
सुहृदा हि अर्थ कृच्चेषु युक्तम् बुद्धिमता सता ।समर्थेन अपि सम्देष्टुम् शाश्वतीम् भूतिम् इच्चता॥
suhṛdā hi artha kṛcceṣu yuktam buddhimatā satā |samarthena api samdeṣṭum śāśvatīm bhūtim iccatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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