वाल्मीकि रामायण 6.18.40
लंका न आसादितुम् शक्या स इन्द्रैर् अपि सुर असुरैः ।विभीषणस्य शूरस्य यथा अर्थम् क्रियताम् वचः॥
laṃkā na āsāditum śakyā sa indrair api sura asuraiḥ |vibhīṣaṇasya śūrasya yathā artham kriyatām vacaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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