वाल्मीकि रामायण 6.22.16
तम् तथा समतिक्रान्तम् नातिचक्राम राघवः ।समुद्धतममित्रघ्नो रामो नदनदीपतिम्॥
tam tathā samatikrāntam nāticakrāma rāghavaḥ |samuddhatamamitraghno rāmo nadanadīpatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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