वाल्मीकि रामायण 6.22.70
योजनानि महावेगैः कृतानि त्वरितैस्ततः ।पञ्चमेन तथा चाह्ना प्लवगैः क्षिप्रकारिभिः॥
yojanāni mahāvegaiḥ kṛtāni tvaritaistataḥ |pañcamena tathā cāhnā plavagaiḥ kṣiprakāribhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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