वाल्मीकि रामायण 6.39.16
कुर्वन्तस् ते महा वेगा महीम् चारण पीडिताम् ।अजश् च सहसा एव ऊर्ध्वम् जगाम चरण उद्धतम्॥
kurvantas te mahā vegā mahīm cāraṇa pīḍitām |ajaś ca sahasā eva ūrdhvam jagāma caraṇa uddhatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें