वाल्मीकि रामायण 6.39.27
ताम् समृद्धाम् समृद्ध अर्थो लक्ष्मीवाम्ल् लक्ष्मण अग्रजः ।रावणस्य पुरीम् रामो ददर्श सह वानरैः॥
tām samṛddhām samṛddha artho lakṣmīvāml lakṣmaṇa agrajaḥ |rāvaṇasya purīm rāmo dadarśa saha vānaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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