वाल्मीकि रामायण 6.39.3
चम्पक अशोक पुम्नाग साल ताल समाकुला ।तमाल वन संचन्ना नाग माला समावृता॥
campaka aśoka pumnāga sāla tāla samākulā |tamāla vana saṃcannā nāga mālā samāvṛtā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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