वाल्मीकि रामायण 6.40.3
ददर्श लङ्कां सुन्यस्तां रम्यकाननशोभिताम् ।तस्यां गोपुरशृङ्गस्थं राक्षसेन्द्रं दुरासदम्॥
dadarśa laṅkāṃ sunyastāṃ ramyakānanaśobhitām |tasyāṃ gopuraśṛṅgasthaṃ rākṣasendraṃ durāsadam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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