वाल्मीकि रामायण 6.40.4
श्वेतचामरपर्यन्तं विजयच्चत्रशोभितम् ।रक्तचन्दनसंलिप्तं रक्ताभरणभूषितम्॥
śvetacāmaraparyantaṃ vijayaccatraśobhitam |raktacandanasaṃliptaṃ raktābharaṇabhūṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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