वाल्मीकि रामायण 6.41.3
संशये स्थाप्य मां चेदं बलं च सविभीषणम् ।कष्टं कृतमिदं वीर साहसं साहसप्रिय॥
saṃśaye sthāpya māṃ cedaṃ balaṃ ca savibhīṣaṇam |kaṣṭaṃ kṛtamidaṃ vīra sāhasaṃ sāhasapriya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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