वाल्मीकि रामायण 6.41.4
इदानीं मा कृथा वीर एवंविधमचिन्तितम् ।त्वयि किञ्चित् समापन्ने किं कार्यं सीतया मम॥
idānīṃ mā kṛthā vīra evaṃvidhamacintitam |tvayi kiñcit samāpanne kiṃ kāryaṃ sītayā mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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