वाल्मीकि रामायण 6.41.31
तां सुरैरपि दुर्धर्षां रामवाक्यप्रचोदिताः ।यथानिवेशं सम्पीड्य न्यविशन्त वनौकसः॥
tāṃ surairapi durdharṣāṃ rāmavākyapracoditāḥ |yathāniveśaṃ sampīḍya nyaviśanta vanaukasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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