वाल्मीकि रामायण 6.45.3
विनतं जाम्बवन्तं च सानुप्रस्थं महाबलम् ।ऋषभं चर्षभस्कन्धमादिदेश परन्तपः॥
vinataṃ jāmbavantaṃ ca sānuprasthaṃ mahābalam |ṛṣabhaṃ carṣabhaskandhamādideśa parantapaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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