वाल्मीकि रामायण 6.45.4
ते सम्प्रहृष्टा हरयो भीमानुद्यम्य पादपान् ।आकाशं विविशुः सर्वे मार्गमाणा दिशो दश॥
te samprahṛṣṭā harayo bhīmānudyamya pādapān |ākāśaṃ viviśuḥ sarve mārgamāṇā diśo daśa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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