वाल्मीकि रामायण 6.45.5
तेषां वेगवतां वेगमिषुभिर्वेगवत्तरैः ।अस्त्रवित् परमास्त्रैस्तु वारयामास रावणिः॥
teṣāṃ vegavatāṃ vegamiṣubhirvegavattaraiḥ |astravit paramāstraistu vārayāmāsa rāvaṇiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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