वाल्मीकि रामायण 6.46.2
वृष्ट्वेवोपरते देवे कृतकर्मणि राक्षसे ।आजगामाथ तं देशं ससुग्रीवो विभीषणः॥
vṛṣṭvevoparate deve kṛtakarmaṇi rākṣase |ājagāmātha taṃ deśaṃ sasugrīvo vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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