वाल्मीकि रामायण 6.46.3
नीलद्विविदमैन्दाश्च सुषेणकुमुदाङ्गदाः ।तूर्णं हनुमता सार्धमन्वशोचन्त राघवौ॥
nīladvividamaindāśca suṣeṇakumudāṅgadāḥ |tūrṇaṃ hanumatā sārdhamanvaśocanta rāghavau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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