वाल्मीकि रामायण 6.48.2
ऊचुर्लक्षणिनो ये मां पुत्रिण्यविधवेति च ।ते ऽद्य सर्वे हते रामे ज्ञानिनो ऽनृतवादिनः॥
ūcurlakṣaṇino ye māṃ putriṇyavidhaveti ca |te 'dya sarve hate rāme jñānino 'nṛtavādinaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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