वाल्मीकि रामायण 6.48.4
ऊचुः संश्रवणे ये मां द्विजाः कार्तान्तिकाः शुभाम् ।ते ऽद्य सर्वे हते रामे ज्ञानिनो ऽनृतवादिनः॥
ūcuḥ saṃśravaṇe ye māṃ dvijāḥ kārtāntikāḥ śubhām |te 'dya sarve hate rāme jñānino 'nṛtavādinaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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