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वाल्मीकि रामायण 6.49.10
कथं वक्ष्यामि शत्रुघ्नं भरतं च यशस्विनम्॥
kathaṃ vakṣyāmi śatrughnaṃ bharataṃ ca yaśasvinam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंकथं वक्ष्यामि शत्रुघ्नं भरतं च यशस्विनम्॥
kathaṃ vakṣyāmi śatrughnaṃ bharataṃ ca yaśasvinam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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