वाल्मीकि रामायण 6.49.13
धिङ्मां दुष्कृतकर्माणमनार्यं यत्कृते ह्यसौ ।लक्ष्मणः पतितः शेते शरतल्पे गतासुवत्॥
dhiṅmāṃ duṣkṛtakarmāṇamanāryaṃ yatkṛte hyasau |lakṣmaṇaḥ patitaḥ śete śaratalpe gatāsuvat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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