वाल्मीकि रामायण 6.49.16
शयानः शरतल्पे ऽस्मिन् स्वशोणितपरिप्लुतः ।शरजालैश्चितो भाति भास्करो ऽस्तमिव व्रजन्॥
śayānaḥ śaratalpe 'smin svaśoṇitapariplutaḥ |śarajālaiścito bhāti bhāskaro 'stamiva vrajan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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