वाल्मीकि रामायण 6.49.17
बाणाभिहतमर्मत्वान्न शक्नोत्यभिभाषितुम् ।रुजा चाब्रुवतो ऽप्यस्य दृष्टिरागेण सूच्यते॥
bāṇābhihatamarmatvānna śaknotyabhibhāṣitum |rujā cābruvato 'pyasya dṛṣṭirāgeṇa sūcyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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