वाल्मीकि रामायण 6.49.24
अस्मिन्मुहूर्ते सुग्रीव प्रतियातुमितो ऽर्हसि ।मत्वा हीनं मया राजन् रावणो ऽभिद्रवेद्बली॥
asminmuhūrte sugrīva pratiyātumito 'rhasi |matvā hīnaṃ mayā rājan rāvaṇo 'bhidravedbalī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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