वाल्मीकि रामायण 6.49.3
एतस्मिन्नन्तरे रामः प्रत्यबुध्यत वीर्यवान् ।स्थिरत्वात् सत्त्वयोगाच्च शरैः सन्दानितो ऽपि सन्॥
etasminnantare rāmaḥ pratyabudhyata vīryavān |sthiratvāt sattvayogācca śaraiḥ sandānito 'pi san ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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