वाल्मीकि रामायण 6.52.2
तेषां सुतुमुलं युद्धं सञ्जज्ञे हरिरक्षसाम् ।अन्योन्यं पादपैर्घोरं निघ्नतां शूलमुद्गरैः॥
teṣāṃ sutumulaṃ yuddhaṃ sañjajñe harirakṣasām |anyonyaṃ pādapairghoraṃ nighnatāṃ śūlamudgaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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