वाल्मीकि रामायण 6.53.3
गच्छ त्वं वीर निर्याहि राक्षसैः परिवारितः ।जहि दाशरथिं रामं सुग्रीवं वानरैः सह॥
gaccha tvaṃ vīra niryāhi rākṣasaiḥ parivāritaḥ |jahi dāśarathiṃ rāmaṃ sugrīvaṃ vānaraiḥ saha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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