वाल्मीकि रामायण 6.53.4
तथेत्युक्त्वा द्रुततरं मायावी राक्षसेश्वरः ।निर्जगाम बलै सार्धं बहुभिः परिवारितः॥
tathetyuktvā drutataraṃ māyāvī rākṣaseśvaraḥ |nirjagāma balai sārdhaṃ bahubhiḥ parivāritaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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