वाल्मीकि रामायण 6.54.22
तं दृष्ट्वा वज्रदंष्ट्रस्य विक्रमं प्लवगर्षभः ।प्रगृह्य विपुलं शैलं चिक्षेप च ननाद च॥
taṃ dṛṣṭvā vajradaṃṣṭrasya vikramaṃ plavagarṣabhaḥ |pragṛhya vipulaṃ śailaṃ cikṣepa ca nanāda ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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