वाल्मीकि रामायण 6.59.40
स सायको रावणबाहुमुक्तः शक्राशनिप्रख्यवपुः शिताग्रः ।सुग्रीवमासाद्य बिभेद वेगाद् गुहेरिता क्रौञ्चमिवोग्रशक्तिः॥
sa sāyako rāvaṇabāhumuktaḥ śakrāśaniprakhyavapuḥ śitāgraḥ |sugrīvamāsādya bibheda vegād guheritā krauñcamivograśaktiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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