वाल्मीकि रामायण 6.6.4
आविला च पुरी लंका सर्वा हनुमता कृता ।किम् करिष्यामि भद्रम् वः किम् वा युक्तम् अनन्तरम्॥
āvilā ca purī laṃkā sarvā hanumatā kṛtā |kim kariṣyāmi bhadram vaḥ kim vā yuktam anantaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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