वाल्मीकि रामायण 6.60.18
स तु सङ्ख्ये महाबाहुः ककुदः सर्वरक्षसाम् ।वानरान् राजपुत्रौ च क्षिप्रमेव वधिष्यति॥
sa tu saṅkhye mahābāhuḥ kakudaḥ sarvarakṣasām |vānarān rājaputrau ca kṣiprameva vadhiṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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