वाल्मीकि रामायण 6.60.20
रामेण हि निरस्तस्य सङ्ग्रामे ऽस्मिन् सुदारुणे ।भविष्यति न मे शोकः कुम्भकर्णे विबोधिते॥
rāmeṇa hi nirastasya saṅgrāme 'smin sudāruṇe |bhaviṣyati na me śokaḥ kumbhakarṇe vibodhite ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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